कुछ कर रहा ,,,,,,कुछ देख रहा
जज्बातों का दोर था ,
तन्हाइयो का मोड़ था ,
कलम की ताकत थी ,
वक्त का ज़ोर था ,
पन्नो पर स्याही थी ,
तजुर्बो का बोल था ,
इश्क़ की बातें थी ,
हर लफ्ज का मोल था ,
एक बदलता सा दोर था ,
कही बदलते रास्ते तो ,
कही बदलते लफ्ज थे
कही राह मे बेड़िया तो ,
कही लफ़्ज के शोर थे
कही बेडियों मे बंधा रहा ,
कही लफ्जों को तोल रहा
मे आज भी खड़ा रहा ,
कुछ कर रहा ,,,,,कुछ देख रहा
👉 पूजा शर्मा _
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