गुरुवार, 17 नवंबर 2022

कुछ कर रहा,,,,,,कुछ देख रहा

 

                                       कुछ  कर  रहा    ,,,,,,कुछ देख रहा 

जज्बातों का दोर था ,

 तन्हाइयो का मोड़ था ,

कलम की ताकत थी ,

वक्त का ज़ोर था ,

            पन्नो पर स्याही थी , 

             तजुर्बो का बोल था , 

             इश्क़ की बातें थी ,

              हर लफ्ज का मोल था  ,

             एक बदलता सा दोर था ,

 कही बदलते रास्ते तो ,

           कही बदलते लफ्ज थे 

कही राह मे बेड़िया तो ,

            कही लफ़्ज के शोर थे

 कही बेडियों मे बंधा रहा ,

             कही लफ्जों को तोल रहा

मे आज भी खड़ा रहा ,

             कुछ कर  रहा ,,,,,कुछ देख रहा



👉 पूजा शर्मा _

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""my journey of 18-19""

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