"शीर्षक" -- और डूब के जाना है }}}}}.....
ये इश्क़ नही आसां
,,,,,,बस लफ़्ज-ए-महोब्बत का अदना सा फजाना है
ये इश्क़ नही आसां
,,,,,बस लफ़्ज-ए-आशिक़ी का हुस्न-ओ-जमाल जमाना है
कुछ यू समझ लो लफ्जों का दरिया है
और समंदर सा खजाना है
थोडा डूब जाना है
कुछ संभल जाना है
ये वक्त नही आसां
थोडा रुक के जाना है
एक आग़ का दरिया है
और डूब के जाना है
कुछ यू समझ लो
किसी कश्ती का किनारा है
डूब गयी सो पतवार नहीं
जो थमी रही सो साख़ है
रुक कर चलती कश्ती का , शायद कोई फरमान है
लेकर उन लहरों से कुछ बुँदे आज
मुझे भी डूब जाना है
,,,,,,कुछ संभल जाना है
क्यूकि
ये वक्त नही आसां
थोडा रुक के जाना है
एक आग़ का दरिया है
और डूब के जाना है
(पूजा _शर्मा )
[ "आग़ का दरिया " written by " kururtulen hedar " sahab ]
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