पेड़ के परिंदे है ,
हम हवाओ मे रहते है ,
चहचाहते है राह मे ना आते है,
लेकर पवन के शोर से,
हम अपना गीत बनाते है,
आजादी के इस पल को हम,
बड़े चाव से निभाते है,
भुत का पता नही ,
भविष्य ना सवाल है,
बस मेरी पहचान है ,
की ,,,खुले आसमान के उड़ते ताज है,
लेकर सक्षियत से कुछ दाने ,
मै फिर से उड़ जाता हु ,
एक नए दाने की तलाश मे,
मै फिर से लग जाता हु,
ना मंजिल की तलाश है ना,
रूह के इस्लाम है ,
बस एक नन्हा सा आसमान है,
जिसमे पवन का शोर है ,
क्या खूब कहू इस जीवन को ,
हर दिन जीने का रुखसार है ,
ना कोई सवाल है ना कोई जवाब है,
लहरों से लेकर कुछ बुँदे ,
मै अपनी प्यास बुझाता हु,
हर लम्हे मे मै कुछ नया ही खोज कर लाता हु,
(पूजा शर्मा
)
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